तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
मेयर यह तय नहीं करता कि किस निर्माण को नोटिस थमाना है या किसे ढहाना है
कोलकाता। तारातल्ला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की दुखद घटना पर अब सियासत चरम पर पहुंच गई है। विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकिम का नाम सीधे तौर पर घसीटे जाने के बाद, अब पूर्व मेयर ने भी मोर्चा खोल दिया है। फिरहाद हकिम ने मुख्यमंत्री के आरोपों पर कड़ा पलटवार करते हुए साफ कहा कि किसी भी भवन निर्माण योजना (बिल्डिंग प्लान) को मंजूरी देने का अधिकार न तो उनके पास कभी था और न ही नगर निगम के किसी मेयर के पास ऐसा कोई अधिकार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण से जुड़े सभी तकनीकी और प्रशासनिक फैसले पूरी तरह से कोलकाता नगर निगम के बिल्डिंग विभाग के अधीन होते हैं, इसमें मेयर की भूमिका केवल एक औपचारिक हस्ताक्षरकर्ता से ज्यादा कुछ नहीं होती।
दरअसल, विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तारातल्ला के ध्वस्त गोदाम से जुड़े दस्तावेज लहराते हुए दावा किया था कि इस बिल्डिंग प्लान पर तत्कालीन मेयर फिरहाद हकिम के हस्ताक्षर मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कड़े तेवर दिखाते हुए चेतावनी दी थी कि दोषियों को न सिर्फ जेल भेजा जाएगा, बल्कि उनकी संपत्तियां भी कुर्क की जाएंगी।
शुभेंदु अधिकारी के इसी हमले पर जवाब देते हुए फिरहाद हकिम ने कहा कि मैं कोई इंजीनियरिंग का छात्र नहीं हूं और न ही किसी भवन योजना की तकनीकी बारीकियों या उसकी वैधता को परखना मेरा काम है। म्युनिसिपल बिल्डिंग कमेटी (एमबीसी) में बड़े-बड़े तकनीकी विशेषज्ञ और क्वालिफाइड इंजीनियर होते हैं, जो हर पहलू की जांच करते हैं। उनके हरी झंडी देने के बाद ही फाइलें आगे बढ़ती हैं। अगर किसी कागज पर मेरे दस्तखत हैं भी, तो वह महज एक प्रशासनिक औपचारिकता का हिस्सा है। मेयर यह तय नहीं करता कि किस निर्माण को नोटिस थमाना है या किसे ढहाना है।
राजनीतिक तल्खी के बीच एक हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब फिरहाद हकिम ने हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सेना, एनडीआरएफ और पुलिस ने जिस युद्धस्तर पर मलबे से जिंदगियां निकालीं, वह वाकई काबिले-तारीफ है और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद भी दिया है। हकिम ने यह दावा भी किया कि उनकी जानकारी के अनुसार गोदाम का निर्माण पूरी तरह से अवैध नहीं था, बल्कि इसके पास जरूरी मंजूरियां थीं। हालांकि, उन्होंने माना कि निर्माण के दौरान जमीनी स्तर पर निगरानी और निरीक्षण में भारी चूक जरूर हुई है, लेकिन इस लापरवाही के लिए सीधे तौर पर मेयर को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।